MUSKURA KE TO JAAIYE

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शनिवार, 30 अप्रैल 2022

नारी का श्रृंगार तो पति है

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: नारी का श्रृंगार तो पति है: नारी का श्रृंगार तो पति है पति पर जान लुटाए एक एक गुण देख सोचकर कली फूल सी खिलती जाए प्रेम ही बोती प्रेम उगाती नारी प्यारी रचती जाए ***** प्...

गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

पृथ्वी दिवस

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: पृथ्वी दिवस: मित्रों पृथ्वी दिवस की ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। पहली बार, पृथ्वी दिवस सन् 1970 में मनाया ...
मित्रों पृथ्वी दिवस की ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं
पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। पहली बार, पृथ्वी दिवस सन् 1970 में मनाया गया था। दुनिया भर के लोग अपनी धरती की प्राकृतिक संपत्ति को बचाने के लिए बड़े उत्साह के साथ ये पृथ्वी दिवस मनाते हैं।

इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी. अब इसे लगभग 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है. पृथ्वी दिवस का महत्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि, इस दिन हमें ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पर्यावरणविदों के माध्यम से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है. 
पृथ्वी दिवस जीवन सम्पदा को बचाने व पर्यावरण को ठीक रखने के बारे में जागरूक करता है. 
जनसंख्या वृद्धि ने प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ डाला है, संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए पृथ्वी दिवस जैसे कार्यक्रमों का महत्व आज और भी बढ़ गया है।

 विश्व पृथ्वी दिवस का उदेश्य अपनी पृथ्वी के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए हम सब को प्रेरित करना है।
इस पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एक ऐसा एकमात्र ग्रह है जहाँ आज तक जीवन संभव है। इसलिए, पृथ्वी पर जीवन को जारी रखने के लिए, पृथ्वी को बचाना परम आवश्यक है। 
22 अप्रैल का दिन पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है जिससे कि मानव जाति को पृथ्वी के महत्व के बारे में सब कुछ पता चल सके।
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पृथ्वी को आइए बंजर ना बनाएं, कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक तो हर जगह ना फैलाएं।
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पृथ्वी हम सबका घर है, इसकी सुरक्षा हम सब पर है।
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आने वाली पीढ़ी है प्यारी, तो पृथ्वी को बचाना है हमारी जिम्मेदारी …
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धरती माता करे पुकार, हरा भरा कर दो संसार।
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दिल लगाने से अच्छा है कि पौधे लगाएं, वो घाव नहीं देंगे, कम से कम छांव तो देंगे।
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पानी बचाएं पेड़ लगाएं पर्यावरण संरक्षण में अपना हाथ बंटाऐं।

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़ , उत्तर प्रदेश , भारत।

रविवार, 10 अप्रैल 2022

कन्या पूजन चैत्र नवरात्रि

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: कन्या पूजन चैत्र नवरात्रि: चैत्र नवरात्रि में मां जगदम्बे की पूजा पाठ के अलावा  कन्या या कंजिका पूजन और गरीब बच्चों के भोज का महत्व और  आनंद  अद्भुत होता है  , नौ दिन ...

शुक्रवार, 25 मार्च 2022

विरहिन

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: विरहिन: बगिया में कोयल कूके मन ना भाए मोरे साजन न आए लाल लाल फूल खिले जिया को जलाए बदरंग होली अगुन लगाए सूख गई बाली बाली तपन बढ़ी उर सजना से ही हरिय...

बुधवार, 23 मार्च 2022

गौरैया

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: गौरैया: गौरैया ..... ..... सुबह सवेरे नित्य ही उठ मैं दाना डालूं चीं चीँ चूं चूं बोल बोल के गौरैया को पा _ लूं खंजन मैना तोता आते अपने सुर में गाते ...

शनिवार, 19 मार्च 2022

शनिवार, 12 जून 2021

बाल श्रम निषेध

 


मित्रों जय श्री राधे, बाल श्रम निषेध के बारे में लोगों को सतत जागरूक करना हम सब का दायित्व है माता पिता जागरूक होंगे तो निश्चित ही वे साथ देंगे और इस अभिशाप से मुक्ति मिल सकेगी हम सभी जो साहित्य से जुड़े , पत्रकारिता से जुड़े, न्याय के कार्यों से जुड़े हैं उनका तो विशेष दायित्व बनता है ।

बाल श्रम (निषेध व नियमन) कानून 1986- यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पेशे और 57 प्रक्रियाओं में, जिन्हें बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिये अहितकर माना गया है, नियोजन को निषिद्ध बनाता है। इन पेशों और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की अनुसूची में वर्णित है।
हमारी इस प्यारी दुनिया मे बसे हर व्यक्ति का बचपन जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है । क्योंकि बचपन ही एक ऐसा अमूल्य समय होता है जिसमे हम तीव्र गति से बिना ईर्ष्या, घमंड के हर कुछ सीखते है जो देखते हैं उसका अनुकरण करते हैं जिस पर हमारा भविष्य निर्मित होता है ।
 सभी बच्चों का पूरा अधिकार है कि इन के माता-पिता उनकी सही परवरिश करें, उन्हे अच्छी शिक्षा दिलाएं, विद्यालय मे भेजें और दोस्तों के साथ खेलने फलने फूलने का पूरा समय दे । लेकिन बाल मजदूरी से इन फूल जैसे प्यारे बच्चों का पूरा जीवन बरबाद हो जाता है ।

हमारे देश मे 14 साल की कम उम्र वाले बच्चों से काम करवाना गैरकानूनी है । लेकिन प्रायः देखा जाता है कि माता-पिता की पीड़ा, गरीबी, भुखमरी और लाचारी से प्यारे बच्चे बाल मजदूरी के खतरनाक दलदल में धंसते फंसते चले जाते हैं ।
साधारण भाषा मे अगर समझा जाय तो किसी भी क्षेत्र में बच्चों से काम दबावपूर्णं करवाया जाए तो उसे बाल मजदूरी या बालश्रम कहते हैं ।

आज बाल श्रम पर इतने कड़े नियम कानून के होते हुए भी जिधर देखिए बाल श्रमिक का मकड़ जाल फैला पड़ा है ईंट भट्ठों में, होटलों में, छोटे कारखानों में , कबाड़ की दुकानों में बहुतायत ये दिखते हैं , जिसे हमारा श्रमिक विभाग अनदेखी कर नजर बंद किए घूमता रहता है। 
जरूरत है ऐसे माता पिता को अधिक जागरूक किया जाए उनके साथ श्रम विभाग कड़ाई भी करे। 
 क्या श्रम विभाग के आला अधिकारी जो अपने कार्य क्षेत्र में इन पर रोक नहीं लगा पाते , देखते घूम रहे नजरअंदाज किए, तो उनके ऊपर कार्यवाही न सुनिश्चित किया जाए??

भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी जी जिन्होंने बाल श्रम को रोकने के लिए अपना पूर्ण सहयोग दिया तथा इसके लिए उन्हें विश्व का सर्वश्रेष्ठ सम्मान ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला। ये मध्य प्रदेश में पैदा हुए और अपनी शिक्षक की नौकरी त्यागकर ‘बालश्रम’ की समाप्ति के कार्य में लग गये। 1980 में इन्होंने ‘बचपन बचाओ’ नामक एक आन्दोलन चलाया। 144 देशों में इन्होंने लगभग 83,000 बच्चों को बालश्रम से उबारा और उनकी शिक्षा आदि का भी विभिन्न सरकारों के सहयोग से प्रबन्ध कराया था।
कुल मिलाकर हमे बाल श्रम के अभिशाप से कैसे भी उबरना होगा कल यही बच्चे हमारे देश के अध्यापक, वैज्ञानिक, साहित्यकार आदि , कर्णधार बनेंगे और देश की प्रगति में सहायक होंगे।
आइए मित्रों और जागरूक बनें और बनाएं, जय श्री राधे।
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

शनिवार, 15 मई 2021

कोठी अटारी पे आए कागा

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कोठी अटारी पे आए कागा

नथुनी बेसर छू छू भागे

चांद चकोर से मन जो लागा

प्राण पखेरू न उड़ मिल जाए

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़ , उत्तर प्रदेश,

भारत

बुधवार, 12 मई 2021

कोरोना है डरा रहा

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कोरोना है डरा रहा, 

चुन चुन करे शिकार

आंख बन्द माने नहीं , 

शामिल हुए हजार।

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कोरोना से मत डरो, 

अपनाओ सब ढाल

हृष्ट पुष्ट ताकत रखो,

कर लो प्राणायाम,

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काढ़ा भाप गर्म पानी लो,

घर में करो आराम,

मास्क सैनिटाइजर ना भूलो,

बाहर गर हो काम

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अदरक तुलसी मिर्च हो काली, 

लौंगा और गिलोय

नीबू सेंधा नमक प्याज भी,

घर में करो प्रयोग

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रूप प्रभु के यहां चिकित्सक

लो सलाह भरपूर

जो बोलें तुम करो दवाई

खा लो थोड़ा धूप

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कुछ कपूर हो लौंग साथ में,

कभी कभी लो सूंघ

प्रोन पोजिशन लेट सांस लो,

ऑक्सिजन भरपूर।

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प्रात उठो टहलो बस घर में

योग ध्यान कसरत कुछ कर लो,

पौधों फूलों से कुछ खेलो

प्यार करो हंस लो मुस्का लो।

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आंधी आए कुछ फल गिरते

बचते फिर मजबूत

आओ बांटें व्यथा सभी की,

हृदय बचे ना कोई शूल।

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

भारत

रविवार, 11 अप्रैल 2021

नेह निमंत्रण दे जाते कुछ

 छुआ जब से मुझको तूने

खिल गई हूं

कली से मै फूल बनकर

भ्रमर आते ढेर सारे

छुप रही हूं

ना सताएं शूल बनकर

गुनगुनाते छेड़ते कितने तराने

खुश बहुत हूं

तार की झनकार बनकर

मधु पराग खुश्बू ले उड़ते

फिर हूं रचती अन्नपूर्णा -

स्नेह घट मै कुंभ बनकर

नेह निमंत्रण दे जाते कुछ

झांक नैनों पढ़ रही हूं

संग जाती हूं कभी मुस्कान बनकर

वेदनाएं ले उदासी घूमते कुछ

धड़कनें दिल की समझती

अश्रु धारा मै सहेजूं सीप बनकर

नत हुए कुछ पाप ले मिलते शरण तो

पूत करती मै पवित्री

बह रही जग गंगा यमुना धार बनकर

स्नेह पूजा मान देते ढेर सारे

प्रकृति अपनी देवी मां हूं

बलि हुई हूं

सुख प्रदाता हवन बनकर


सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5, 

12.04.2021

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

आई माई मेरी अम्मा है प्राण सी

 आई माई मेरी अम्मा है प्राण सी

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रूपसी थी कभी चांद सी तू खिली

ओढ़े घूंघट में तू माथे सूरज लिए

नैन करुणा भरे ज्योति जीवन लिए

स्वर्ण आभा चमक चांदनी से सजी

गोल पृथ्वी झुलाती जहां नाथती

तेरे अधरों पे खुशियां रही नाचती

घोल मधु तू सरस बोल थी बोलती

नाचते मोर कलियां थी पर खोलती

फूल खिल जाते थे कूजते थे बिहग

माथ मेरे फिराती थी तू तेरा कर

लौट आता था सपनों से ए मां मेरी 

मिलती जन्नत खुशी तेरी आंखों भरी 

दौड़ आंचल तेरे जब मै छुप जाता था

क्या कहूं कितना सारा मै सुख पाता था

मोहिनी मूर्ति ममता की दिल आज भी

क्या कभी भूल सकता है संसार भी

गीत तू साज तू मेरा संगीत भी

शब्द वाणी मेरी पंख परवाज़ भी

नैन तू दृश्य तू शस्त्र भी ढाल भी

जिसने जीवन दिया पालती पोषती

नीर सी क्षीर सी अंग सारे बसी

 आई माई मेरी अम्मा है प्राण सी


सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत , 10.4.2021

प्रिय ने शायद देख लिया

आज चांद का रंग कुछ बदला , 

' प्रिय ' ने शायद देख लिया ।

लाल तभी है मेरा मुखड़ा,  

नैन उतर दिल नेह किया ।।


सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

कर सोलह श्रृंगार नटी ये

 कर सोलह श्रृंगार नटी ये

...…...……..........

नीले नभ पे श्वेत बदरिया

मलयानिल मिल रूप आंकती

हिमगिरि पे ज्यों पार्वती मां

सुंदरता की मूर्ति झांकती

……....….....

शिव हों भोले ठाढे जैसे

बादल बड़े भयावह काले

वहीं सात नन्हे शिशु खेलें

ब्रह्मा विष्णु सभी सुख ले लें

……..…............

निर्झर झरने नील स्वच्छ जल

कल कल निनादिनी सरिता देखो

हरियाली चहुं ओर है पसरी

स्वर्ण रश्मि अनुपम छवि देखो

…...................

कर सोलह श्रृंगार नटी ये

प्रकृति मोहती जन मन देखो

..…

श्वेत कबूतर ले गुलाब है

उड़ा आ रहा स्वागत कर लो

…...…........

फूल की घाटी तितली भौंरे

कलियों फूल से खेल रहे

खुशबू मादक सी सुगन्ध ले

नैन नशीले बोल रहे

......

पंछी कुल है हमें जगाता

कलरव करते दुनिया घूमे

छलक उठा अमृत घट जैसे

अमृत वर्षा हर मुख चूमे

...........

हहर हहर तरू झूम रहे हैं

लहर लहर नदिया बल खाती

गोरी सिर अमृत घट लेकर

रोज सुबह आ हमे उठाती

..........

ओस की बूंदें मोती जैसे

दर्पण बन जग हमे दिखाती

करें खेल अधरो नैनों से

बड़ी मोहिनी हमे रिझाती

............

कहीं नाचते मोर मोरनी

झंकृत स्वर हैं कीट पतंगे

रंग बिरंगी अद्भुत कृति की

शोभा निखरी किस मुंह कह दें

,.....….........

मन कहता भर अनुपम छवि उर

नैन मूंद बस कुटी रमाऊं

स्नेह सिक्त मां तेरा आंचल

शिशु बन मै दुलराता जाऊं

..........

उठो सुबह हे! ब्रह्म मुहूरत

योग ध्यान से भरो खजाना

वीणा के सुर ताल छेड़ लो

क्या जाने कब लौट के आना ।

.........

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

भारत 8.4.2021

मंगलवार, 6 अप्रैल 2021

मुझको भी ले चल तू मुन्ना रंग बिरंगे सपनों में

 नैन मूंद मत करे अकेला

मेरे जीवन का तू मेला

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना

रंग बिरंगे सपनों में....


अंक भरूं मै चंदा मामा

सूरज चाचू को जल दे दूं

तारों संग कुछ कंचा खेलूं

नील गगन में सैर करूं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना......


परियों संग मै खेलूं कूदूं

सप्तऋषि संग वेद पढूं

परियों की जादुई छड़ी लेे

शक्तिमान बन खेल करूं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना.........


तितली बन मै फूल की घाटी

पर्वत चढ़ बादल से खेलूं

कामधेनु से मांग खिलौने

कल्पवृक्ष पे झूला झूलूं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना

रंग बिरंगे सपनों में....


नदियां सागर झील व झरने

हरे भरे जंगल में घूमूं

हाथी दादा हिरन मोर से

करूं दोस्ती सब सुख लेे लूं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना

रंग बिरंगे सपनों में....


गौरैया तोता बुलबुल संग

राजहंस बगुला संग उड़ लूं

ले प्यारे बच्चों की टोली

कान्हा संग मै माखन खाऊं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना

रंग बिरंगे सपनों में....


चलूं घुटुरुवन छुन्नुन छुन्नून

पैजनिया पैरन में पाऊं

उठूं गिरूं चीखूं चिल्ला के

मां की गोदी में छुप जाऊं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना

रंग बिरंगे सपनों में....


आंख बंद जब तू मुस्काए

तीन देव संग जग हंस जाए

अधर तुम्हारे जब रोने को

मातृ दे वियां सब दुलराएं

मुझको भी लेे चल तू मुन्ना.........


सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश, भारत

बुधवार, 31 मार्च 2021

पल्लव कोंपल है गोद हरी

 शीत बतास औे पाला सहे नित

ठूंठ बने हिय ताना सुने जग

कूंच गई फल फूल मिले

तेरे साहस पे नतमस्तक सब

पल्लव कोंपल है गोद हरी

रस भर महुआ निर्झर झर झर

सब खीझत रीझत दुलराते

सम्मोहित कुछ वश खो जाते

मधु रस आकर्षित भ्रमर कभी

री होली फाग सुनावत हैं

छलकाए देत रस की गागर

ज्यों अमृत पान करावत है

ऋतुराज वसंत भी देख चकित

गोरी चंदा तू कर्पूर धवल

रचिता बनिता दुहिता गुण चित

चहुं लोक बखान बखानत बस

शुध चित्त मर्मज्ञ हरित वसनी

पावन करती निर्झर जननी

बल खाती सरिता कंटक पथ

उफनत हहरत सागर दिल पर

कुछ दबती सहती शोर करे

गर्जन बन मोर नचावत तो

कुछ नाथ लेे नाथ रिझावत है

मंथन कर जग कुछ सूत्र दिए

मदिरा मदहोश हैं राहु केतु 

कुछ देव मनुज संसार हेतु

री अमृत घट करुणा रस की

मै हार गया वर्णन सिय पी

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सुरेंद्र कुमार शुक्ल

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत

प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू

 बार बार उड़ने की कोशिश

गिरती और संभलती थी

कांटों की परवाह बिना वो

गुल गुलाब सी खिलती थी

सूर्य रश्मि से तेज लिए वो

चंदा सी थी दमक रही

सरिता प्यारी कलरव करते

झरने चढ़ ज्यों गिरि पे जाती

शीतल मनहर दिव्य वायु सी

बदली बन नभ में उड़ जाती

कभी सींचती प्राण ओज वो

बिजली दुर्गा भी बन जाती

करुणा नेह गेह लक्ष्मी हे

कितने अगणित रूप दिखाती

प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू

प्रेम मूर्ति पर बलि बलि जाती

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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत