शनिवार, 30 अप्रैल 2022
नारी का श्रृंगार तो पति है
शुक्रवार, 25 मार्च 2022
विरहिन
रविवार, 11 अप्रैल 2021
नेह निमंत्रण दे जाते कुछ
छुआ जब से मुझको तूने
खिल गई हूं
कली से मै फूल बनकर
भ्रमर आते ढेर सारे
छुप रही हूं
ना सताएं शूल बनकर
गुनगुनाते छेड़ते कितने तराने
खुश बहुत हूं
तार की झनकार बनकर
मधु पराग खुश्बू ले उड़ते
फिर हूं रचती अन्नपूर्णा -
स्नेह घट मै कुंभ बनकर
नेह निमंत्रण दे जाते कुछ
झांक नैनों पढ़ रही हूं
संग जाती हूं कभी मुस्कान बनकर
वेदनाएं ले उदासी घूमते कुछ
धड़कनें दिल की समझती
अश्रु धारा मै सहेजूं सीप बनकर
नत हुए कुछ पाप ले मिलते शरण तो
पूत करती मै पवित्री
बह रही जग गंगा यमुना धार बनकर
स्नेह पूजा मान देते ढेर सारे
प्रकृति अपनी देवी मां हूं
बलि हुई हूं
सुख प्रदाता हवन बनकर
सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5,
12.04.2021
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021
प्रिय ने शायद देख लिया
आज चांद का रंग कुछ बदला ,
' प्रिय ' ने शायद देख लिया ।
लाल तभी है मेरा मुखड़ा,
नैन उतर दिल नेह किया ।।
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
बुधवार, 31 मार्च 2021
पल्लव कोंपल है गोद हरी
शीत बतास औे पाला सहे नित
ठूंठ बने हिय ताना सुने जग
कूंच गई फल फूल मिले
तेरे साहस पे नतमस्तक सब
पल्लव कोंपल है गोद हरी
रस भर महुआ निर्झर झर झर
सब खीझत रीझत दुलराते
सम्मोहित कुछ वश खो जाते
मधु रस आकर्षित भ्रमर कभी
री होली फाग सुनावत हैं
छलकाए देत रस की गागर
ज्यों अमृत पान करावत है
ऋतुराज वसंत भी देख चकित
गोरी चंदा तू कर्पूर धवल
रचिता बनिता दुहिता गुण चित
चहुं लोक बखान बखानत बस
शुध चित्त मर्मज्ञ हरित वसनी
पावन करती निर्झर जननी
बल खाती सरिता कंटक पथ
उफनत हहरत सागर दिल पर
कुछ दबती सहती शोर करे
गर्जन बन मोर नचावत तो
कुछ नाथ लेे नाथ रिझावत है
मंथन कर जग कुछ सूत्र दिए
मदिरा मदहोश हैं राहु केतु
कुछ देव मनुज संसार हेतु
री अमृत घट करुणा रस की
मै हार गया वर्णन सिय पी
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सुरेंद्र कुमार शुक्ल
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत
प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू
बार बार उड़ने की कोशिश
गिरती और संभलती थी
कांटों की परवाह बिना वो
गुल गुलाब सी खिलती थी
सूर्य रश्मि से तेज लिए वो
चंदा सी थी दमक रही
सरिता प्यारी कलरव करते
झरने चढ़ ज्यों गिरि पे जाती
शीतल मनहर दिव्य वायु सी
बदली बन नभ में उड़ जाती
कभी सींचती प्राण ओज वो
बिजली दुर्गा भी बन जाती
करुणा नेह गेह लक्ष्मी हे
कितने अगणित रूप दिखाती
प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू
प्रेम मूर्ति पर बलि बलि जाती
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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत
